नवरात्रि पूजा सामग्री सूची, मंत्र और नौ दिनों की पूजा विधि 2026

3 days ago

नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह पर्व माँ दुर्गा की नौ शक्तियों की उपासना को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, साहस, सकारात्मकता और आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है।

नवरात्रि के दौरान भक्त कलश स्थापना, दुर्गा पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ, मंत्र जाप, आरती और व्रत जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। कुछ परिवारों में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है।

इस लेख में हम जानेंगे कि नवरात्रि पूजा के लिए कौन-कौन सी सामग्री आवश्यक है, कलश स्थापना कैसे करें, प्रतिदिन किस देवी की पूजा की जाती है और कौन-से मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

1. नवरात्रि पूजा सामग्री की पूरी सूची

पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें, ताकि पूजा के दौरान किसी वस्तु की कमी न हो।

A. कलश स्थापना की सामग्री

  • तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश

  • स्वच्छ जल या परंपरा के अनुसार गंगाजल

  • आम के पत्ते या उपलब्ध शुभ पत्ते

  • साबुत नारियल

  • लाल या पीला कपड़ा

  • मौली या कलावा

  • अक्षत यानी साबुत चावल

  • रोली, कुमकुम और हल्दी

  • सुपारी, सिक्के और पुष्प

  • कलश के नीचे रखने के लिए मिट्टी की थाली या पात्र

  • जौ बोने के लिए मिट्टी और जौ के बीज, यदि आपके परिवार की परंपरा में प्रचलित हों

B. माँ दुर्गा की पूजा सामग्री

  • माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर

  • लाल चुनरी या वस्त्र

  • लाल फूल, गुलाब और गुड़हल जैसे उपलब्ध पुष्प

  • फूलों की माला

  • चंदन, कुमकुम और रोली

  • अक्षत

  • धूपबत्ती और अगरबत्ती

  • घी या तेल का दीपक

  • रुई की बाती

  • कपूर

  • फल और मौसमी प्रसाद

  • मिठाई, मिश्री या बताशे

  • पान, सुपारी और इलायची, यदि परंपरा में उपयोग किए जाते हों

  • पूजा की थाली, घंटी और आसन

C. भोग और प्रसाद की सामग्री

  • फल

  • दूध, दही या अन्य सात्त्विक सामग्री

  • मखाना, सूखे मेवे और मिश्री

  • हलवा, पूरी, खीर या घर में बनाया गया सात्त्विक प्रसाद

  • व्रत के लिए फलाहारी सामग्री

  • कन्या पूजन के लिए भोजन और आवश्यकतानुसार उपहार

ध्यान दें: पूजा सामग्री की मात्रा और प्रकार परिवार, क्षेत्र और कुल-परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। सभी वस्तुएँ उपलब्ध न हों, तो श्रद्धा और स्वच्छता के साथ उपलब्ध सामग्री से भी पूजा की जा सकती है।

2. नवरात्रि कलश स्थापना की विधि

कलश स्थापना को नवरात्रि पूजा का महत्वपूर्ण आरंभ माना जाता है। इसे घटस्थापना भी कहा जाता है।

कलश स्थापना के चरण

चरण 1: पूजा स्थान की सफाई करें

घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। माँ दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें और पूजा के लिए स्वच्छ आसन रखें।

चरण 2: पूजा का संकल्प लें

हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर अपनी श्रद्धा के अनुसार माँ दुर्गा का स्मरण करें। मन में पूजा और व्रत का संकल्प लें।

चरण 3: जौ बोएँ

यदि आपकी परंपरा में जौ बोने का विधान है, तो मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी डालकर जौ के बीज बोएँ और हल्का जल छिड़कें।

चरण 4: कलश तैयार करें

कलश में परंपरा के अनुसार जल भरें। उसमें अक्षत, सुपारी या सिक्का डाल सकते हैं। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। नारियल को लाल कपड़े या मौली से सजाया जा सकता है।

चरण 5: कलश स्थापित करें

कलश को पूजा स्थान पर जौ वाले पात्र के पास या उसके ऊपर, अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार स्थापित करें।

चरण 6: माँ दुर्गा का पूजन करें

माँ दुर्गा को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद मंत्र जाप और आरती करें।

महत्वपूर्ण: घटस्थापना का शुभ मुहूर्त हर वर्ष पंचांग और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार निर्धारित होता है। पूजा के दिन अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग से समय अवश्य जाँचें।

3. नवरात्रि के प्रमुख मंत्र

नवरात्रि में अपनी श्रद्धा, समय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

1. माँ दुर्गा का सामान्य मंत्र

मंत्र:

ॐ दुं दुर्गायै नमः॥

अर्थ: माँ दुर्गा को नमन, जो भक्तों को साहस, शक्ति और रक्षा की भावना प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।

जाप: अपनी सुविधा के अनुसार 11, 21 या 108 बार।

2. माँ दुर्गा का सर्वकल्याण मंत्र

मंत्र:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे माँ नारायणी! आप सभी मंगलों में मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारी हैं और सभी शुभ उद्देश्यों की सिद्धि का आधार मानी जाती हैं। आपको नमन है।

3. माँ के प्रति समर्पण का मंत्र

मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बार-बार प्रणाम है।

4. माँ शैलपुत्री का मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

5. माँ ब्रह्मचारिणी का मंत्र

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

6. माँ चंद्रघंटा का मंत्र

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

7. माँ कूष्मांडा का मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

8. माँ स्कंदमाता का मंत्र

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

9. माँ कात्यायनी का मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

10. माँ कालरात्रि का मंत्र

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

11. माँ महागौरी का मंत्र

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

12. माँ सिद्धिदात्री का मंत्र

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

भक्त प्रतिदिन संबंधित देवी के मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्रों की संख्या से अधिक नियमितता, श्रद्धा और मन की एकाग्रता पर ध्यान दें।

4. नवरात्रि के नौ दिन: देवी, पूजा और भोग

पहला दिन — माँ शैलपुत्री

माँ शैलपुत्री को शक्ति, स्थिरता और प्रकृति से जुड़ा स्वरूप माना जाता है।

  • पूजा: कलश स्थापना और माँ शैलपुत्री का पूजन

  • मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

  • परंपरागत भोग: गाय का घी या घी से बना प्रसाद

  • आध्यात्मिक संदेश: जीवन में स्थिरता और दृढ़ संकल्प बनाए रखें।

दूसरा दिन — माँ ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या, संयम और साधना की प्रतीक मानी जाती हैं।

  • पूजा: पुष्प अर्पित करके मंत्र जाप और ध्यान करें।

  • मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

  • परंपरागत भोग: मिश्री, शक्कर या फल

  • आध्यात्मिक संदेश: धैर्य और अनुशासन का अभ्यास करें।

तीसरा दिन — माँ चंद्रघंटा

माँ चंद्रघंटा को साहस, शौर्य और निर्भयता से जोड़ा जाता है।

  • पूजा: दीप जलाकर माँ का ध्यान करें।

  • मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

  • परंपरागत भोग: दूध या दूध से बनी मिठाई

  • आध्यात्मिक संदेश: कठिन परिस्थितियों में साहस और संतुलन रखें।

चौथा दिन — माँ कूष्मांडा

माँ कूष्मांडा को सृजनात्मक ऊर्जा और जीवन शक्ति का स्वरूप माना जाता है।

  • पूजा: पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें।

  • मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

  • परंपरागत भोग: मालपुआ या उपलब्ध सात्त्विक प्रसाद

  • आध्यात्मिक संदेश: सकारात्मक सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा दें।

पाँचवाँ दिन — माँ स्कंदमाता

माँ स्कंदमाता को मातृत्व, करुणा और स्नेह का प्रतीक माना जाता है।

  • पूजा: माँ का ध्यान करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

  • मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

  • परंपरागत भोग: केला या केले से बना प्रसाद

  • आध्यात्मिक संदेश: प्रेम, करुणा और परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाएँ।

छठा दिन — माँ कात्यायनी

माँ कात्यायनी को शक्ति, साहस और संकल्प से जोड़ा जाता है।

  • पूजा: लाल या पीले पुष्प अर्पित कर मंत्र जाप करें।

  • मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

  • परंपरागत भोग: शहद

  • आध्यात्मिक संदेश: अपने लक्ष्य के लिए दृढ़ता से प्रयास करें।

सातवाँ दिन — माँ कालरात्रि

माँ कालरात्रि को अज्ञान और भय का नाश करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है।

  • पूजा: श्रद्धापूर्वक दीप जलाएँ और माँ का ध्यान करें।

  • मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

  • परंपरागत भोग: गुड़ या गुड़ से बना प्रसाद

  • आध्यात्मिक संदेश: भय का सामना विवेक और साहस से करें।

आठवाँ दिन — माँ महागौरी

माँ महागौरी को पवित्रता, शांति और करुणा का स्वरूप माना जाता है।

  • पूजा: पुष्प, फल और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।

  • मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

  • परंपरागत भोग: नारियल या नारियल से बना प्रसाद

  • विशेष अनुष्ठान: अनेक परिवारों में इस दिन कन्या पूजन किया जाता है।

  • आध्यात्मिक संदेश: मन, वाणी और कर्म में शुद्धता बनाए रखें।

नौवाँ दिन — माँ सिद्धिदात्री

माँ सिद्धिदात्री को ज्ञान, साधना और सिद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।

  • पूजा: माँ का पूजन, मंत्र जाप और आरती करें।

  • मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

  • परंपरागत भोग: हलवा, पूरी, चना या अन्य सात्त्विक प्रसाद

  • विशेष अनुष्ठान: कई परिवार नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करते हैं।

  • आध्यात्मिक संदेश: ज्ञान, विनम्रता और सद्कर्मों को जीवन में स्थान दें।

नोट: भोग की परंपराएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं। ऊपर दी गई सूची प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।

5. नवरात्रि में प्रतिदिन पूजा करने की सरल विधि

यदि आप नौ दिनों तक नियमित पूजा करना चाहते हैं, तो यह सरल दिनचर्या अपना सकते हैं:

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. पूजा स्थान की सफाई करें और माँ दुर्गा के सामने दीप जलाएँ।

  3. गणेश जी और अपने इष्ट देव का स्मरण करें।

  4. माँ दुर्गा को पुष्प, अक्षत, कुमकुम और नैवेद्य अर्पित करें।

  5. उस दिन के देवी स्वरूप के मंत्र का जाप करें।

  6. अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या अन्य स्तोत्र का पाठ करें।

  7. माँ दुर्गा की आरती करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

  8. प्रसाद बाँटें और दिनभर यथासंभव सात्त्विक आचरण रखें।

पूजा की अवधि आपकी सुविधा के अनुसार हो सकती है। यदि विस्तृत अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा या योग्य पुरोहित से मार्गदर्शन लें।

6. नवरात्रि व्रत के नियम

नवरात्रि में व्रत रखने की पद्धति अलग-अलग परिवारों में अलग होती है। सामान्यतः इन बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • व्रत के दौरान अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्त्विक भोजन करें।

  • अनाज, नमक और अन्य खाद्य पदार्थों के नियम अपने व्रत की पद्धति के अनुसार तय करें।

  • पूजा स्थान और भोजन की स्वच्छता बनाए रखें।

  • क्रोध, कटु वचन और अनावश्यक विवाद से बचने का प्रयास करें।

  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और यथाशक्ति दान करें।

  • व्रत शरीर की क्षमता के अनुसार रखें। अस्वस्थता, गर्भावस्था, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।

याद रखें: उपवास का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि आत्मसंयम, प्रार्थना और सद्कर्मों पर ध्यान देना भी है।

7. अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन की विधि

कई परिवारों में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। कुछ परंपराओं में छोटे बालक को भी भैरव स्वरूप मानकर आमंत्रित किया जाता है।

सामान्य विधि:

  1. कन्याओं को आदरपूर्वक आमंत्रित करें।

  2. उनके बैठने के लिए स्वच्छ आसन रखें।

  3. अपनी परंपरा के अनुसार तिलक लगाएँ और पुष्प अर्पित करें।

  4. हलवा, पूरी, चना या अन्य सात्त्विक भोजन प्रेमपूर्वक परोसें।

  5. अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें।

  6. सभी बच्चों के प्रति सम्मान और स्नेह रखें।

बच्चों को भोजन देने से पहले उनकी खाद्य एलर्जी और भोजन संबंधी आवश्यकताओं का ध्यान रखें। कन्या पूजन की संख्या और विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

8. नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें?

क्या करें?

  • नियमित पूजा और मंत्र जाप करें।

  • घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।

  • जरूरतमंदों की सहायता करें।

  • संयमित वाणी और सकारात्मक व्यवहार अपनाएँ।

  • व्रत के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

  • अपनी पारिवारिक धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें।

किन बातों से बचें?

  • पूजा को लेकर भय या अनावश्यक चिंता न करें।

  • दूसरों की पूजा-पद्धति की आलोचना न करें।

  • व्रत के नाम पर शरीर को अत्यधिक कष्ट न दें।

  • बिना जानकारी के किसी कठिन धार्मिक अनुष्ठान का संकल्प न लें।

  • किसी वस्तु, मंत्र या उपाय को निश्चित धन, सफलता या स्वास्थ्य की गारंटी न मानें।

9. नवरात्रि पूजा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: नवरात्रि पूजा के लिए सबसे जरूरी सामग्री कौन-सी है?

माँ दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा, दीपक, धूप, पुष्प, कुमकुम, अक्षत, जल और नैवेद्य से सामान्य पूजा की जा सकती है। कलश स्थापना करने पर कलश, नारियल और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य सामग्री भी रखें।

प्रश्न 2: क्या कलश स्थापना करना अनिवार्य है?

यह परिवार और पूजा-पद्धति पर निर्भर करता है। कुछ परिवार कलश स्थापना करते हैं, जबकि अन्य सामान्य देवी पूजन और मंत्र जाप करते हैं।

प्रश्न 3: नवरात्रि में कौन-सा मंत्र सबसे अच्छा है?

आप अपनी श्रद्धा के अनुसार “ॐ दुं दुर्गायै नमः॥” या “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता…” मंत्र का जाप कर सकते हैं। नियमितता और एकाग्रता पर ध्यान दें।

प्रश्न 4: क्या नवरात्रि में बिना व्रत के पूजा कर सकते हैं?

हाँ। अनेक लोग व्रत रखे बिना भी माँ दुर्गा की पूजा, मंत्र जाप और आरती करते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्णय लें।

प्रश्न 5: अष्टमी और नवमी में से कन्या पूजन किस दिन करना चाहिए?

यह आपके परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग पर निर्भर करता है। अपने क्षेत्र में प्रचलित तिथि और पूजा-विधान के अनुसार कन्या पूजन करें।

प्रश्न 6: क्या नवरात्रि में रोज दुर्गा चालीसा पढ़ना जरूरी है?

यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। आप अपनी श्रद्धा, समय और परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा, देवी मंत्र, स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं।

प्रश्न 7: घटस्थापना का मुहूर्त कैसे पता करें?

घटस्थापना का मुहूर्त संबंधित वर्ष की तिथि, स्थानीय सूर्योदय और पंचांग पर निर्भर करता है। अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग या योग्य पुरोहित से समय की पुष्टि करें।

निष्कर्ष

नवरात्रि माँ दुर्गा की उपासना, आत्मचिंतन और सद्कर्मों का पावन अवसर है। पूजा सामग्री को पहले से तैयार करने, नौ दिनों के देवी स्वरूपों का स्मरण करने और अपनी परंपरा के अनुसार मंत्र जाप व आरती करने से पूजा व्यवस्थित रूप से की जा सकती है।

माँ दुर्गा से प्रार्थना करें कि सभी के जीवन में साहस, विवेक, शांति और सद्भाव बना रहे।

जय माता दी! ??